ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 8686.21ऋग्वेद 86.21पुन॒रेहि॑ वृषाकपे सुवि॒ता क॑ल्पयावहै । य ए॒ष स्व॑प्न॒नंश॒नोऽस्त॒मेषि॑ प॒था पुन॒र्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥२१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय