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ऋग्वेद 85.37

तां पू॑षञ्छि॒वत॑मा॒मेर॑यस्व॒ यस्यां॒ बीजं॑ मनु॒ष्या॒३ वप॑न्ति ।
या न॑ ऊ॒रू उ॑श॒ती वि॒श्रया॑ते॒ यस्या॑मु॒शन्त॑ः प्र॒हरा॑म॒ शेप॑म् ॥३७॥

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