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ऋग्वेद 76.1

आ व॑ ऋञ्जस ऊ॒र्जां व्यु॑ष्टि॒ष्विन्द्रं॑ म॒रुतो॒ रोद॑सी अनक्तन ।
उ॒भे यथा॑ नो॒ अह॑नी सचा॒भुवा॒ सद॑ःसदो वरिव॒स्यात॑ उ॒द्भिदा॑ ॥१॥

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