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ऋग्वेद 69.6

सम॒ज्र्या॑ पर्व॒त्या॒३ वसू॑नि॒ दासा॑ वृ॒त्राण्यार्या॑ जिगेथ ।
शूर॑ इव धृ॒ष्णुश्च्यव॑नो॒ जना॑नां॒ त्वम॑ग्ने पृतना॒यूँर॒भि ष्या॑ः ॥६॥

पूरा अध्याय