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ऋग्वेद 65.13

पावी॑रवी तन्य॒तुरेक॑पाद॒जो दि॒वो ध॒र्ता सिन्धु॒राप॑ः समु॒द्रिय॑ः ।
विश्वे॑ दे॒वास॑ः शृणव॒न्वचां॑सि मे॒ सर॑स्वती स॒ह धी॒भिः पुरं॑ध्या ॥१३॥

पूरा अध्याय