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ऋग्वेद 63.6

को व॒ः स्तोमं॑ राधति॒ यं जुजो॑षथ॒ विश्वे॑ देवासो मनुषो॒ यति॒ ष्ठन॑ ।
को वो॑ऽध्व॒रं तु॑विजाता॒ अरं॑ कर॒द्यो न॒ः पर्ष॒दत्यंह॑ः स्व॒स्तये॑ ॥६॥

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