ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 6161.27ऋग्वेद 61.27त ऊ॒ षु णो॑ म॒हो य॑जत्रा भू॒त दे॑वास ऊ॒तये॑ स॒जोषा॑ः । ये वाजाँ॒ अन॑यता वि॒यन्तो॒ ये स्था नि॑चे॒तारो॒ अमू॑राः ॥२७॥पिछलापूरा अध्याय