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ऋग्वेद 60.11

न्य१ग्वातोऽव॑ वाति॒ न्य॑क्तपति॒ सूर्य॑ः । नी॒चीन॑म॒घ्न्या दु॑हे॒ न्य॑ग्भवतु ते॒ रप॑ः ॥११॥

पूरा अध्याय