ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 5858.9ऋग्वेद 58.9यत्ते॒ पर्व॑तान्बृह॒तो मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय