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ऋग्वेद 56.4

म॒हि॒म्न ए॑षां पि॒तर॑श्च॒नेशि॑रे दे॒वा दे॒वेष्व॑दधु॒रपि॒ क्रतु॑म् ।
सम॑विव्यचुरु॒त यान्यत्वि॑षु॒रैषां॑ त॒नूषु॒ नि वि॑विशु॒ः पुन॑ः ॥४॥

पूरा अध्याय