Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 52.5

आ वो॑ यक्ष्यमृत॒त्वं सु॒वीरं॒ यथा॑ वो देवा॒ वरि॑व॒ः करा॑णि ।
आ बा॒ह्वोर्वज्र॒मिन्द्र॑स्य धेया॒मथे॒मा विश्वा॒ः पृत॑ना जयाति ॥५॥

पूरा अध्याय