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ऋग्वेद 27.17

पीवा॑नं मे॒षम॑पचन्त वी॒रा न्यु॑प्ता अ॒क्षा अनु॑ दी॒व आ॑सन् ।
द्वा धनुं॑ बृह॒तीम॒प्स्व१न्तः प॒वित्र॑वन्ता चरतः पु॒नन्ता॑ ॥१७॥

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