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ऋग्वेद 26.8

आ ते॒ रथ॑स्य पूषन्न॒जा धुरं॑ ववृत्युः । विश्व॑स्या॒र्थिन॒ः सखा॑ सनो॒जा अन॑पच्युतः ॥८॥

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