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ऋग्वेद 25.4

समु॒ प्र य॑न्ति धी॒तय॒ः सर्गा॑सोऽव॒ताँ इ॑व ।
क्रतुं॑ नः सोम जी॒वसे॒ वि वो॒ मदे॑ धा॒रया॑ चम॒साँ इ॑व॒ विव॑क्षसे ॥४॥

पूरा अध्याय