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ऋग्वेद 24.5

विश्वे॑ दे॒वा अ॑कृपन्त समी॒च्योर्नि॒ष्पत॑न्त्योः । नास॑त्यावब्रुवन्दे॒वाः पुन॒रा व॑हता॒दिति॑ ॥५॥

पूरा अध्याय