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ऋग्वेद 191.4

स॒मा॒नी व॒ आकू॑तिः समा॒ना हृद॑यानि वः । स॒मा॒नम॑स्तु वो॒ मनो॒ यथा॑ व॒ः सुस॒हास॑ति ॥४॥

पूरा अध्याय