ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 184184.2ऋग्वेद 184.2गर्भं॑ धेहि सिनीवालि॒ गर्भं॑ धेहि सरस्वति । गर्भं॑ ते अ॒श्विनौ॑ दे॒वावा ध॑त्तां॒ पुष्क॑रस्रजा ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय