Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 176.2

प्र दे॒वं दे॒व्या धि॒या भर॑ता जा॒तवे॑दसम् । ह॒व्या नो॑ वक्षदानु॒षक् ॥२॥

पूरा अध्याय