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ऋग्वेद 172.2

पि॒तु॒भृतो॒ न तन्तु॒मित्सु॒दान॑व॒ः प्रति॑ दध्मो॒ यजा॑मसि।३
उ॒षा अप॒ स्वसु॒स्तम॒ः सं व॑र्तयति वर्त॒निं सु॑जा॒तता॑ ॥२॥

पूरा अध्याय