ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 164164.1ऋग्वेद 164.1अपे॑हि मनसस्प॒तेऽप॑ क्राम प॒रश्च॑र । प॒रो निॠ॑त्या॒ आ च॑क्ष्व बहु॒धा जीव॑तो॒ मन॑ः ॥१॥अगलापूरा अध्याय