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ऋग्वेद 155.5

परी॒मे गाम॑नेषत॒ पर्य॒ग्निम॑हृषत । दे॒वेष्व॑क्रत॒ श्रव॒ः क इ॒माँ आ द॑धर्षति ॥५॥

पूरा अध्याय