ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 153153.3ऋग्वेद 153.3त्वमि॑न्द्रासि वृत्र॒हा व्य१न्तरि॑क्षमतिरः । उद्द्याम॑स्तभ्ना॒ ओज॑सा ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय