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ऋग्वेद 15.4

बर्हि॑षदः पितर ऊ॒त्य१र्वागि॒मा वो॑ ह॒व्या च॑कृमा जु॒षध्व॑म् ।
त आ ग॒ताव॑सा॒ शंत॑मे॒नाऽथा॑ न॒ः शं योर॑र॒पो द॑धात ॥४॥

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