Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 141.4

इ॒न्द्र॒वा॒यू बृह॒स्पतिं॑ सु॒हवे॒ह ह॑वामहे । यथा॑ न॒ः सर्व॒ इज्जन॒ः संग॑त्यां सु॒मना॒ अस॑त् ॥४॥

पूरा अध्याय