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ऋग्वेद 140.1

अग्ने॒ तव॒ श्रवो॒ वयो॒ महि॑ भ्राजन्ते अ॒र्चयो॑ विभावसो ।
बृह॑द्भानो॒ शव॑सा॒ वाज॑मु॒क्थ्यं१ दधा॑सि दा॒शुषे॑ कवे ॥१॥

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