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ऋग्वेद 137.7

हस्ता॑भ्यां॒ दश॑शाखाभ्यां जि॒ह्वा वा॒चः पु॑रोग॒वी । अ॒ना॒म॒यि॒त्नुभ्यां॑ त्वा॒ ताभ्यां॒ त्वोप॑ स्पृशामसि ॥७॥

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