Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 137.3

आ वा॑त वाहि भेष॒जं वि वा॑त वाहि॒ यद्रप॑ः । त्वं हि वि॒श्वभे॑षजो दे॒वानां॑ दू॒त ईय॑से ॥३॥

पूरा अध्याय