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ऋग्वेद 135.5

कः कु॑मा॒रम॑जनय॒द्रथं॒ को निर॑वर्तयत् । कः स्वि॒त्तद॒द्य नो॑ ब्रूयादनु॒देयी॒ यथाभ॑वत् ॥५॥

पूरा अध्याय