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ऋग्वेद 129.6

को अ॒द्धा वे॑द॒ क इ॒ह प्र वो॑च॒त्कुत॒ आजा॑ता॒ कुत॑ इ॒यं विसृ॑ष्टिः ।
अ॒र्वाग्दे॒वा अ॒स्य वि॒सर्ज॑ने॒नाऽथा॒ को वे॑द॒ यत॑ आब॒भूव॑ ॥६॥

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