ऋग्वेद 128.5
देवी॑ः षळुर्वीरु॒रु न॑ः कृणोत॒ विश्वे॑ देवास इ॒ह वी॑रयध्वम् ।
मा हा॑स्महि प्र॒जया॒ मा त॒नूभि॒र्मा र॑धाम द्विष॒ते सो॑म राजन् ॥५॥
देवी॑ः षळुर्वीरु॒रु न॑ः कृणोत॒ विश्वे॑ देवास इ॒ह वी॑रयध्वम् ।
मा हा॑स्महि प्र॒जया॒ मा त॒नूभि॒र्मा र॑धाम द्विष॒ते सो॑म राजन् ॥५॥