ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 118118.8ऋग्वेद 118.8स त्वम॑ग्ने॒ प्रती॑केन॒ प्रत्यो॑ष यातुधा॒न्य॑ः । उ॒रु॒क्षये॑षु॒ दीद्य॑त् ॥८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय