ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 118118.2ऋग्वेद 118.2उत्ति॑ष्ठसि॒ स्वा॑हुतो घृ॒तानि॒ प्रति॑ मोदसे । यत्त्वा॒ स्रुच॑ः स॒मस्थि॑रन् ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय