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ऋग्वेद 114.9

कश्छन्द॑सां॒ योग॒मा वे॑द॒ धीर॒ः को धिष्ण्यां॒ प्रति॒ वाचं॑ पपाद ।
कमृ॒त्विजा॑मष्ट॒मं शूर॑माहु॒र्हरी॒ इन्द्र॑स्य॒ नि चि॑काय॒ कः स्वि॑त् ॥९॥

पूरा अध्याय