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ऋग्वेद 92.13

उष॒स्तच्चि॒त्रमा भ॑रा॒स्मभ्यं॑ वाजिनीवति । येन॑ तो॒कं च॒ तन॑यं च॒ धाम॑हे ॥१३॥

पूरा अध्याय