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ऋग्वेद 81.5

आ प॑प्रौ॒ पार्थि॑वं॒ रजो॑ बद्ब॒धे रो॑च॒ना दि॒वि ।
न त्वावाँ॑ इन्द्र॒ कश्च॒न न जा॒तो न ज॑निष्य॒ते ऽति॒ विश्वं॑ ववक्षिथ ॥५॥

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