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ऋग्वेद 81.3

यदु॒दीर॑त आ॒जयो॑ धृ॒ष्णवे॑ धीयते॒ धना॑ ।
यु॒क्ष्वा म॑द॒च्युता॒ हरी॒ कं हन॒ः कं वसौ॑ दधो॒ ऽस्माँ इ॑न्द्र॒ वसौ॑ दधः ॥३॥

पूरा अध्याय