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ऋग्वेद 77.4

स नो॑ नृ॒णां नृत॑मो रि॒शादा॑ अ॒ग्निर्गिरोऽव॑सा वेतु धी॒तिम् ।
तना॑ च॒ ये म॒घवा॑न॒ः शवि॑ष्ठा॒ वाज॑प्रसूता इ॒षय॑न्त॒ मन्म॑ ॥४॥

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