ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 6565.6ऋग्वेद 65.6अत्यो॒ नाज्म॒न्, त्सर्ग॑प्रतक्त॒ः सिन्धु॒र्न क्षोद॒ः, क ईं॑ वराते ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय