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ऋग्वेद 62.12

स॒नादे॒व तव॒ रायो॒ गभ॑स्तौ॒ न क्षीय॑न्ते॒ नोप॑ दस्यन्ति दस्म ।
द्यु॒माँ अ॑सि॒ क्रतु॑माँ इन्द्र॒ धीर॒ः शिक्षा॑ शचीव॒स्तव॑ न॒ः शची॑भिः ॥१२॥

पूरा अध्याय