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ऋग्वेद 60.3

तं नव्य॑सी हृ॒द आ जाय॑मानम॒स्मत् सु॑की॒र्तिर्मधु॑जिह्वमश्याः ।
यमृ॒त्विजो॑ वृ॒जने॒ मानु॑षास॒ः प्रय॑स्वन्त आ॒यवो॒ जीज॑नन्त ॥३॥

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