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ऋग्वेद 57.2

अध॑ ते॒ विश्व॒मनु॑ हासदि॒ष्टय॒ आपो॑ नि॒म्नेव॒ सव॑ना ह॒विष्म॑तः ।
यत् पर्व॑ते॒ न स॒मशी॑त हर्य॒त इन्द्र॑स्य॒ वज्र॒ः श्नथि॑ता हिर॒ण्यय॑ः ॥२॥

पूरा अध्याय