ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 5050.4ऋग्वेद 50.4त॒रणि॑र्वि॒श्वद॑र्शतो ज्योति॒ष्कृद॑सि सूर्य । विश्व॒मा भा॑सि रोच॒नम् ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय