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ऋग्वेद 48.8

विश्व॑मस्या नानाम॒ चक्ष॑से॒ जग॒ज् ज्योति॑ष्कृणोति सू॒नरी॑ ।
अप॒ द्वेषो॑ म॒घोनी॑ दुहि॒ता दि॒व उ॒षा उ॑च्छ॒दप॒ स्रिध॑ः ॥८॥

पूरा अध्याय