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ऋग्वेद 48.14

ये चि॒द्धि त्वामृष॑य॒ः पूर्व॑ ऊ॒तये॑ जुहू॒रेऽव॑से महि ।
सा न॒ः स्तोमाँ॑ अ॒भि गृ॑णीहि॒ राध॒सोष॑ः शु॒क्रेण॑ शो॒चिषा॑ ॥१४॥

पूरा अध्याय