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ऋग्वेद 47.3

अश्वि॑ना॒ मधु॑मत्तमं पा॒तं सोम॑मृतावृधा ।
अथा॒द्य द॑स्रा॒ वसु॒ बिभ्र॑ता॒ रथे॑ दा॒श्वांस॒मुप॑ गच्छतम् ॥३॥

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