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ऋग्वेद 40.4

यो वा॒घते॒ ददा॑ति सू॒नरं॒ वसु॒ स ध॑त्ते॒ अक्षि॑ति॒ श्रव॑ः ।
तस्मा॒ इळां॑ सु॒वीरा॒मा य॑जामहे सु॒प्रतू॑र्तिमने॒हस॑म् ॥४॥

पूरा अध्याय