Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 4.5

उ॒त ब्रु॑वन्तु नो॒ निदो॒ निर॒न्यत॑श्चिदारत। दधा॑ना॒ इन्द्र॒ इद् दुव॑ः ॥५॥

पूरा अध्याय