ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 3030.4ऋग्वेद 30.4अ॒यमु॑ ते॒ सम॑तसि क॒पोत॑ इव गर्भ॒धिम् । वच॒स्तच्चि॑न्न ओहसे ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय