Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 3.2

अश्वि॑ना॒ पुरु॑दंससा॒ नरा॒ शवी॑रया धि॒या। धिष्ण्या॒ वन॑तं॒ गिर॑ः ॥२॥

पूरा अध्याय