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ऋग्वेद 29.4

स॒सन्तु॒ त्या अरा॑तयो॒ बोध॑न्तु शूर रा॒तय॑ः ।
आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ ॥४॥

पूरा अध्याय